अभी पढ़ रहे हैं
सस्टेनबल पैकेजिंग के लिए एक व्यापक मार्गदर्शन

सस्टेनबल पैकेजिंग के लिए एक व्यापक मार्गदर्शन

Suchitra
  • हम अपनी खरिदारी के निर्णयों को सस्टेनबल पैकेजिंग के साथ सुनिश्चित करके किस प्रकार संचालित कर सकते हैं? इस विषय में उपलब्ध विकल्प और स्थितियां केवल हमें उलझाने का कार्य करती हैं। प्रस्तुत हैं वह मार्गदर्शन जिसकी आपको पैकेजिंग के समय आवश्यकता पड़ती है।

सन् 2050तक विश्व के समुद्रों और महासागरों में मौजूद प्लास्टिक के कचरे का कुल भार वहां मौजूद मछलियों के समूचे वज़न से भी अधिक हो जाएगा। भारत में प्लास्टिक निर्माण उद्योग द्वारा वर्ष 2020 में लगभग 22 मिलियन टन प्लास्टिक उत्पादन करने का अनुमान है। फिक्की (FICCI) की रिपोर्ट, के अनुसार सन् 2015 में यह मात्रा 13.4 मिलियन टन थी तथा इसमें से लगभग आधी मात्रा एकल प्रयोग प्लास्टिक की है। अतः हम खतरनाक रूप से कचरे के एक बड़े समुद्र की तैयारी के निकट पहुंच गए हैं।

इस प्लास्टिक उत्पाद का 40 प्रतिशत पैकेजिंग के कार्य में प्रयोग होता है।अतः अधिक से अधिक सस्टेनबल पैकेजिंग विकल्पों पर अंतरण करने की सख़्त आवश्यकता है।

सस्टेनबिलिटी उद्यमों में तेज़ी से बढ़ने वाला विषय है क्योंकि उपभोक्ताओं की प्राथमिकता ग्रीन उत्पादों की तरफ़ बढ़ती जा रही है। लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्लास्टिक के प्रभावों के प्रति सजगता निश्चित रूप से बाढ़ रही है।

सस्टेनबल पैकेजिंग से तात्पर्य उस पैकेजिंग से जिसके माध्यम से पर्यावरण में कार्बन पदचिह्न समय के साथ घटते चले जाएं। पैकेजिंग के क्षेत्र में सस्टेनबिलिटी को सामान्य तौर पर तीन प्रकार से प्राप्त किया जा सकता है:

1) सामग्री: 100 प्रतिशत पुनर्चक्रीय तथा/अथवा पैकेजिंग का पर्यावरण हितैषी कच्चा माल

2) उत्पाद का तरीका: उत्पादन प्रक्रिया तथा न्यूनतर कार्बन पदचिह्नों से युक्त कीर्ति श्रृंखलाएं।

3) पुनर्चक्रण की क्षमता: एक चक्रीय अर्थव्यवस्था जिस के भीतर पैकेज सामग्री का जीवन चक्र और उपयोगिता व्यापक हो।

यद्यपि सस्टेनबल पैकेजिंग का अधिकतम सम्बन्ध पर्यावरण सुरक्षा से है फिर भी प्रत्येक पर्यावरण हितैषी सामग्री अनिवार्य रूप से सस्टेनबल नहीं है अपितु उसके साथ पैकेजिंग सामग्री के आर्थिक और सामाजिक पक्षों को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है। यह इसलिए क्योंकि सस्टेनबल पैकेजिंग तुलनात्मक रूप से पारंपरिक एकल प्रयोग पैकेजिंग विकल्पों के समान व्यावहारिक और एसएटीआई होनी भी आवश्यक है। सस्टेनबल पैकेजिंग डिज़ाइन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को कम से कम हानि पहुंचाने वाले पैकेजिंग डिज़ाइन को तैयार करना है।

कौन से पदार्थ सस्टेनबल हैं?

लोग प्रायः इन दोनों शब्दों, 'पर्यावरण हितैषी' तथा 'सस्टेनबल', को एक दूसरे का पर्याय समझते हैं परन्तु यह असत्य है। एक पदार्थ की जैविक रूप से सड़नशीलता से उसकी सस्टेनबिलिटी को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। फिर भी बहुत सारी कम्पनियां इसका उचित महत्व समझे बिना प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग कर रही हैं।

जब पैकेजिंग तथा अधिकाधिक सस्टेनबल निर्णय लेने की बात होती है तो एल्युमिनियम, कांच और काग़ज़ जैसे विकल्पों के चुनाव के आधार बिन्दु होते हैं: प्रयोग किया गया कच्चा माल, उत्पादन लागत तथा प्रक्रियाएं, यातायात पदचिन्ह तथा पुनर्चक्रण दर।

एल्युमिनियम के डिब्बों के विषय में समझें। एल्युमिनियम अधिकतर एक सस्टेनबल विकल्प माना जाता है क्योंकि इससे समुद्री कचरा अपेक्षाकृत रूप से कम पैदा होता है। एल्युमिनियम के प्रयोग का वास्तविक लाभ उसके पुनर्चक्रण में निहित है। #पुनर्चक्रण के साधन आपके क्षेत्र में उपलब्ध हैं। एल्युमिनियम को असंख्य बार पुनर्चक्रित किया जा सकता है और अध्ययनों के अनुसार 75 प्रतिशत एल्युमिनियम वर्तमान में प्रयोग किया जा रहा है। यह दुनिया का सर्वाधिक पुनर्चक्रित पदार्थ सिद्ध हो चुका है। साथ ही क्योंकि एल्युमिनियम हल्का होता है और एल्युमिनियम कैन के लिए जगह का समुचित उपयोग हो सकता है, प्लास्टिक और कांच की बोतलों की अपेक्षा इसमें यातायात की कम आवश्यकता होती है तथा इसमें पेय पदार्थों को ठंडा करने के लिए तापमान सम्बन्धी संचालन गुणों के कारण कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। तथापि इसके प्रयोग की पर्यावरणीय कीमत भी चुकानी पड़ती है। एल्युमिनियम बौक्साइट के रूप में खनन किया जाता है जिसके निस्सारण में बड़ी मात्रा में प्रदूषण उत्पन्न होता है और इसके उत्पादन के समय प्लास्टिक के उत्पादन कि अपेक्षा वातावरण में दुगनी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन होता है। इससे उत्पन्न प्रदूषण की मात्रा एक कार द्वारा 8 किलोमीटर दौड़ने पर निष्कासित प्रदूषण के बराबर है क्योंकि 330 मिली लिटर एल्युमिनियम कैन के उत्पादन में 1300 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासित होती है जो प्रदूषण की सर्वाधिक मात्रा है। समान आकार की प्लास्टिक की बोतल के उत्पादन में 330 ग्राम कार्बन निष्कासन होता है।

काग़ज़ के विषय में क्या विचार है, जो पर्यावरण हितैषी पैकेजिंग विकल्प के रूप में जाना जाता है? काग़ज़ उत्पादन में प्लास्टिक उत्पादन कि अपेक्षा अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह मात्रा भिन्न भिन्न प्रकार की पैकेजिंग के आधार पर भिन्न होती है परन्तु औसत रूप में इसमें तीन गुना अधिक ऊर्जा का उपभोग होता है। प्लास्टिक की अपेक्षा अधिक भारी होने के कारण इसके यातायात के द्वारा भी अधिक प्रदूषण उत्पन्न होता है। एक सामान्य0.7 पाउंड के वज़न का नालीदार बक्सा 0.5 पाउंड के बबल रैप की अपेक्षा ईंधन का उपयोग और यातायात प्रदूषण की अधिक मात्रा पैदा करता है।

Image Source: Indiatimes

प्लास्टिक की बोतलों की अपेक्षा कांच की बोतलों को अधिक सस्टेनबल माना जाता है, इसका मुख्य कारण यह है कि ये पुनः प्रयोग की जा सकती हैं। यद्यपि एक लम्बे समय के लिए ये कांच की बोतलें प्लास्टिक की बोतलों के समान सस्टेनेबल नहीं हो सकतीं। जी हां, कांच की बोतलों को सरलता से उबलते पानी में कीटाणु रहित तथा स्वच्छ किया जा सकता है परन्तु यही प्रक्रिया प्लास्टिक बोतलों के साथ भी कि जा सकती है। आप उन्हें गर्म पानी में धोकर अनेक बार पुनर्प्रयोग कर सकते हैं। साथ ही, कांच के अंगुर होने की अति सम्भावना होने के कारण इसके निर्माण का कार्य कठिन होता है। साथ ही, भारी होने के कारण कांच के यातायात सम्बन्धी कार्बन उत्सर्जन की मात्रा भी अधिक होती है।कांच की पैकेजिंग का निर्माताओं द्वारा हर बार पुनर्प्रयोग या पुनर्चक्रण नहीं किया जा सकता तथा रंगीन कांच को भी ब्लीच द्वारा पुनः पारदर्शी कांच में नहीं बदला जा सकता। कांच की बोतलों के प्रयोग केवल तभी किया जाता है जब पुनर्चक्रीय एल्युमिनियम कैन विकल्प के रूप में प्राप्त नहीं होती।

उपाय क्या होगा?

पैकेजिंग सामग्री के रूप में उपेक्षित किया गया एक विकल्प कृषि सम्बन्धित कचरा जैसे भूसी, घास और है। अनुसंधानों से ज्ञात होता है की कृषि सम्बन्धी कचरे का पैकेजिंग सामग्री के रूप में प्रयोग पर्यावरण के लिए सबसे कम मात्रा में हानिकारक होता है। कुछ कृषि कचरा जैसे गन्ने की फ़सल के कचरे 'खोई' को बड़ी मात्रा में प्रयोग किया जाता है। भारत में यह एक महत्वपूर्ण विकल्प है क्योंकि यहां प्रतिवर्ष लगभग 500 मिलियन टन कृषि कचरा उत्पन्न होता है।

तथापि यह भी याद रखना होगा कि यदि सस्टेनबल पैकेजिंग सामग्री का चुनाव महत्वपूर्ण है तो सस्टेनबल पैकेजिंग डिज़ाइन की भी पैकेजिंग कचरे को कम करने में एक बड़ी भूमिका है। सच याहीभाई की केवल सामग्री का चुनाव ही यह सुनिश्चित कर सकता है कि प्रयोग की गई पैकेजिंग सामग्री पुनर्चक्रीय है या नहीं।

सस्टेनबल पैकेजिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए 'कोरूगैमी' और 'ईकोवेयर' जैसे अनेक ब्रांड सामने आए हैं।

कोरूगैमी कई ब्रांडों और स्टार्ट अप्स के लिए सस्टेनबल पैकेजिंग उपलब्ध करता है। वे 'मून शाइन मीडरी', 'हैमलीज़', तथा 'द बॉम्बे कैंटीन' जैसे ब्रांडों के साथ कार्य कर चुके हैं। वे इन कंपनियों की ना केवल सस्टेनबल सामग्री के चुनाव में मदद करते हैं अपितु पैकेजिंग डिज़ाइन बनाने में भी मदद करते हैं। भारत में कचरे की छंटाई की उपयुक्त प्रणाली नहीं है जिससे पुनर्चक्रीय सामग्री का मुद्दा भी उलझ जाता है।

Image Source: Corugami

कोरूगैमी के प्रधान युक्तिप्रदाता 'उदित बंसल' कहते हैं -"सस्टेनबिलिटी महंगी नहीं होनी चाहिए। डिज़ाइन और संरचना समाधान से ही सस्टेनबिलिटी और इसकी लागत में संतुलन बिठाया जा सकता है। उदाहरणार्थ, तापावरोधन के लिए प्रायः 'प्लास्टिक बबल रैप' का प्रयोग किया जाता है। परन्तु देखा जाए तो तापावरोधन का कार्य प्लास्टिक नहीं करती बल्कि रोधित हवा के कारण है यह सम्भव हो पाता है। हम हवा के रोधन के इस कार्य के लियर काग़ज़ मधुकोश तथा कृषि कचरे, नारियल की घास और अन्य सामग्री की सहायता से अनुसंधान कर रहे हैं। भारत में औद्योगिक काग़ज़ से निर्मित बहुत सी पैकेजिंग खाद बनाने योग्य स्वीकार की जाती है हालांकि इससे घर पर खाद नहीं बनाई जा सकती। इसके लिए औद्योगिक खाद मशीनों की आवश्यकता है जो सरलता से उपलब्ध नहीं होती। इसके हेतु हमारे समक्ष कुछ समाधान हैं। उदाहरण के लिए उत्तरी भारत में कृषि कचरे को वैकल्पिक सस्टेनेबल पैकेजिंग के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। कृषि कचरे को जलाए जाने से उत्तर भारत में एक विशेष मौसम में 'स्मॉग' की मात्रा बाढ़ जाती है", वे कहते हैं। "हमें हर प्रकार के प्लास्टिक के प्रयोग को पूर्ण रूप से समाप्त करने की आवश्यकता नहीं है। एकल प्रयोग प्लास्टिक की उपेक्षा होनी चाहिए। विभिन्न प्रकार की सामग्री की छंटाई को सरल बनाने के लिए और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया की सशक्त प्रणाली हेतु हमें सस्टेनेबल डिज़ाइनों की आवश्यकता है।"

Image Source: Ecoware

इसके साथ ही 'ईकोवेयर' सामान्य फ़सल कचरे जैसे साधारण अनाज, चावल और खोई के कचरे को सस्टेनेबल पैकेजिंग विकल्प में बदलने के कार्य करता है। 'ईकोवेयर' की संस्थापक 'रिया मजूमदार' कहती हैं कि वे चाहती हैं कि लोग चाहे सस्टेनेबिलिटी के विषय में नए सोचें, पर वे कम से कम अपने स्वास्थ्य के विषय में तो सोचें। वे कहती हैं, "हमारे उत्पाद प्राकृतिक रूप से 90 दिनों में 'जैव सड़नशील' होते हैं और वे लैंडफिल्स के कचरे में शामिल नहीं होते।" "जब हमने प्रारम्भ किया था तो सस्टेनेबिलिटी कोई विशेष विषय नहीं था, अतः हमने जागरुकता बढ़ाने के लिए पैसा खर्च किया। यद्यपि अब हमने लागत के इस अंतर को न्यूनतम कर दियाभाई तथा हमारे अधिकतर उत्पाद एकल प्रयोग प्लास्टिक विकल्पों की तुलना में केवल पांच प्रतिशत अधिक महंगे हैं या उतने भी नहीं हैं। 'ईकोवेयर' के उत्पाद प्लास्टिक उत्पादों के समान ही टिकाऊ हैं।" 'ईकोवेयर', 'भारतीय रेलवे', 'हल्दीराम', 'सब्वे' तथा अन्य भोज्य स्टार्ट अप्स जिनमें घरेलू रसोइए और नानबाई शामिल हैं, को फ़सल आधारित त्याज्य पैकेजिंग उपलब्ध कराता है।

आप क्या कर सकते हैं ? सर्वप्रथम — प्लास्टिक की पहचान

एक सजग उपभोक्ता के रूप में आपका पहला कदम प्लास्टिक की पहचान करना है। प्लास्टिक की पैकेजिंग पर अनेक प्रकार के पुनर्चक्रण चिन्ह होते हैं जो आपको उलझन में डालते हैं। उपभोक्ता इनसे हमेशा यही विश्वास करता है कि पैकेजिंग को तुरंत पुनर्चक्रण के लिए भेजना है पर ऐसा नहीं है।

Image Source: PNGitem

'रेसिन आइडेंटिफ़िकेशन कोड' — यानि तीर के निशान के साथ त्रिभुज की आकृति यह संकेत करती है कि पैकेजिंग के उस सामान में किस प्रकार की प्लास्टिक का प्रयोग हुआ है। कोड - 1 वाली प्लास्टिक 'पॉलीथिलीन टेरेफ्थेलेट' होती है — (पी.ई.टी.(PET) अथवा पी.ई.टी.ई.(PETE)) जो सॉफ़्ट ड्रिंक्स की बोतलों तथा सलवट मुक्त वस्त्रों में प्रयुक्त होता है। कोक/पेप्सी की बोतलें पी.ई.टी. बोतलें हैं, ये बोतलें खाद्य संग्रहण लिए सुरक्षित मानी जाती हैं, और पुनर्चक्रीय हैं परन्तु केवल एक बार।

कोड 3,6 और 7 वाली प्लास्टिक को 'मानक पुनर्चक्रण प्रक्रिया' के तहत पुनर्चक्रित नहीं किया जा सकता तथा यह मनुष्य, जानवरों और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकती है। अतः इनके प्रयोग को उपेक्षित करने का सुझाव दिया जाता है। कोड 3 वाली प्लास्टिक 'पॉलीविनाइल क्लोराइड' है (वी(V) या विनाइल(vinyl) या पी.वी.सी.(PVC)) तथा इसका प्रयोग खिलौनों, माउथवॉश के डिब्बों, मेडिकल ट्यूब्स और रक्त के बैग बनाने में किया जाता है। पी.वी.सी. एक हानिकारक प्लास्टिक है तथा बचपन की एलर्जी, अस्थमा, अंतः स्रावी विघटन और एक.एच.डी.एच. को पैदा कर सकती है और इसकी प्रकृति विकट रूप से कैंसरकारक होती है। कोड 6 (पॉलीस्टीरिन) प्लास्टिक अंडे के कार्टन, प्लास्टिक थैलियां, डिब्बे, त्याज्य कटलरी, सी.डी., डी.वी.डी., मेडिकल बोतलें, हैंगर्स, स्मोक अलार्म तथा पैट्री डिश बनाने के लिए किया जाता है। इनके पुनः प्रयोग में 'स्टाइरीन' निकल सकता है जो कैंसर कारक होता है।

कोड 2,4 और 5 वाली प्लास्टिक को पुनर्चक्रण के लिए सर्वाधिक सुरक्षित माना जाता है। कोड 2 प्लास्टिक (पॉलीथाइलीन या एच.डी.पी.ई.(HDPE)) का प्रयोग अपारदर्शी दूध की बोतलें, जूस और पानी की कैन, कुछ दावा की बोतलें तथा शैम्पू और डिटर्जेंट की बोतलें बनाने में किया जाता है। हालांकि एच.डी.पी.ई. को कम से कम मात्रा में प्रयोग करने से सामान्यतः सुरक्षित प्लास्टिक माना जाता है परन्तु अनुसंधान से ज्ञात हिया है कि इससे 'नोनिलफेनॉल' निकलता है, जो अतः स्रावी व्यवधान का कारण बन जाता है। कोड 4 प्लास्टिक (पॉलीथिलीन या एल.डी.पी.ई. (LDPE)) का प्रयोग ब्रैड पैकेजिंग, खरीदारी बैग, फ्रोज़न फूड पैकेजिंग में किया जाता है। ये भी सापेक्षिक रूप से सुरक्षित और पुनर्चक्रण में आसान हैं, जब तक ये पतली परत के रूप में ना आएं।

कोड 5 प्लास्टिक पॉलीप्रोपिलीन या पी.पी. (PP)) प्रयोग खाद्य डिब्बों जैसे चीज़ और दही के कप, कैचप और शर्बत की बोतलों के ढक्कन, स्ट्रॉ, बच्चों की वाहनों व उपकरणों के पुर्जों को बनाने में हिताभाई। यह प्लास्टिक अपेक्षाकृत सुरक्षित है परन्तु व्यावसायिक अस्थमा को पैदा करने का कारण बनती है।

कोड 7 प्लास्टिक तथा अन्य (O) सर्वप्रयोगी श्रेणी की प्लास्टिक है जो पहले बनाई गई श्रेणियों से भिन्न प्लास्टिक पैकेजिंग में प्रयोग होती है अथवा बहुपरत प्लास्टिक पैकेजिंग में प्रयोग होती है अथवा बहुपरत प्लास्टिक के मिश्रण में प्रयोग होती है। कोड 7 वाली प्लास्टिक पुनर्चक्रित नहीं हो सकती।

यद्यपि कोड 1,2,4,5 वाली प्लास्टिक पुनर्चक्रीय हैं परंतु केवल एक सीमा तक ही हैं। अधिकतर प्लास्टिक को निम्नचक्रित किया जाता है जैसे — पायदान, वस्त्र तथा प्लास्टिक काठ बनाने के लिए। ये उत्पाद प्रायः इस स्थिति तक पहुंच जाते हैं कि इन्हें और पुनर्चक्रित नहीं किया जा सकता तथा अंततः लैंडफ़िल में भेज दिया जाता है। अतः प्लास्टिक कचरे को घटाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है — इसके उपभोग को घटाना।

यह कैसे सम्भव है?

सस्टेनेबिलिटी को पाने का एकमात्र उपाय उपभोग को कम करना है। 'अल्प कचरा यात्रा' को प्रारम्भ करने के लिए आपको कुछ अन्य चुनाव करने होंगे।. उदाहरणार्थ के स्थान पर के लिए पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदने की अपेक्षा आप स्वास्थ्यकारी विकल्प के रूप में गाजर चबा सकते हैं। यह स्वास्थ्यकर भी है और सस्टेनेबल भी। आप अन्य भी छोटे छोटे परिवर्तन कर सकते हैं जैसे - शावर जैल के स्थान पर साबुन की टिक्की का प्रयोग तथा पुनर्प्रयोग की जाने वाली बोतल का प्रयोग।

उत्पादों के अन्य उपयोगवारा भी आप उपभोग को कम कर सकते हैं जैसे खाली बोतलों और जारों को पौधे लगाने के लिए प्रयोग, प्रसाधन की बोतलों के बर्तनों के तरल साबुन के लिए प्रयोग आदि।

सस्टेनेबल ब्रांडों की ओर मुड़ें

सस्टेनेबल ब्रांड के उन पदार्थों, पैकेजिंग तथा उत्पादन प्रक्रिया को अपनाते हैं जो अंत तक प्रयोग करने, उत्तम और उपयुक्त कीमत तथा पर्यावरण के लिए हितैषी के रूप में तैयार किए जाते हैं। नैतिक मूल्यों सहित निर्मित इन जैविक उत्पादों को अपनाकर आप यह आश्वासन दे सकते हैं कि उनका ना केवल पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम है अपितु आपके द्वारा प्रयुक्त उत्पादों में किसी कर्मचारी या बाल श्रमिकों का शोषण नहीं किया गया है। 'नो नैस्टीज़', 'हावड़ा ब्रिज', 'पादुक्स', 'मागा', 'मात्रा' बड़े ईको फैशन ब्रांड हैं जबकि 'रॉ नेचर', 'पहाड़ी लोकल', 'फ़ॉरेस्ट एसेंशियल्स', 'ईको बडी', तथा 'लैका' सस्टेनेबल सौंदर्य उत्पाद वाले बड़े ब्रांड हैं।

स्थानीय की ओर बढ़ी अथवा स्वयं सृजन करो

यदि आप उपभोग कोबौर अधिक घटाना चाहते हैं, तो आप वस्तुयों की रचना स्वयं कर सकते हैं अथवा स्थानीय व्यापारों को सहारा दे सकते हैं। यदि आप ब्रैड खरीदते हैं तो इसे स्थानीय बेकरी से खरीदें या इससे भी बेहतर यह है कि स्वयं बनाने का प्रयास करें (स्थानीय आता चक्की से आता खरीदें, ना कि पैकेज्ड आटा)।

आप टूथपेस्ट ट्यूब खरीदने के बजाय स्वयं अपना टूथपेस्ट बना सकते हैं अथवा प्लास्टिक पैकेजिंग में रसायनिक स्वच्छता उत्पाद खरीदने की बजाए 'जैव ऐंज़ाइम' आधारित अपना स्वच्छता उत्पाद स्वयं बनाइए।

हालांकि हम अपने प्रयोग को बनाने तथा उनकी पैकेजिंग की सामग्री के चुनाव में एक सामंजस्य बिठा सकते हैं, फिर भी हमारा ध्यान एक 'न्यूनतम कचरा जीवन शैली' के चुनाव पर होना चाहिए। पुनर्चक्रण या निम्नचक्रण कोई उपयुक्त उपाय नहीं है, यह केवल अंतिम विकल्प है। हमारा लक्ष्य कम करना तथा पुनर्प्रयोग करना होना चाहिए। उपभोक्ता पैकेजिंग कचरे को कम करने का तरीका केवल अपने खरीदारी के चुनाव के विषय में सोचना है है। यद्यपि सस्टेनेबल पैकेजिंग के प्रश्न का निश्चित उत्तर खोजना बहुत अद्भुत है तथापि वास्तविकता इतनी सरल नहीं है।

वृहद स्तर पर इस समस्या का समाधान उचित नीतियां बनाना तथा इस प्रक्रिया के प्रति ज़िम्मेदार बनना है जबकि लघु स्तर पर अपने उपभोग को घटाना और न्यूनतम त्याज्य जीवन शैली के माध्यम से पैकेजिंग की आवश्यकता को कम करना ही है।

View Comments (0)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Scroll To Top

Eco-Conscious Shopping- एक्स्प्लोर करें

Shop Ethically- Earn Ethicoins

Shipping Flat Rs 99 for All Orders- एक्स्प्लोर करें